पहली बार अपहरण के बाद आरोपी को छूट देना बेटी के लिए बन गया मौत का कारण

पहली बार छात्रा के अपहरण के बाद निकिता के पिता मूलचंद तोमर का मुख्य आरोपी तौसीफ के परिवार से समझौता कर लेना बेटी के लिए मौत का कारण बन गया। यदि परिवार उस समय समझौता नहीं किया होता तो शायद आरोपी की इतनी हिम्मत नहीं बढ़ती और आज बेटी जिंदा होती। लेकिन पिता ने सामाजिक बदनामी से बचने के लिए बड़े बुजुर्गों की सलाह पर यह कदम उठाया था। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यही समझौता दो साल बाद उनकी बेटी के लिए मौत का कारण बन जाएगा।

करीब 25 साल पहले यूपी के हापुड़ जिले से बच्चों का पालन पोषण करने के लिए बल्लभगढ़ आए मूलचंद तोमर को अब इस बात का पछतावा हो रहा है। एक निजी कंपनी में काम करने वाले मृतका के पिता ने बच्चों की पढ़ाई में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

वह बेटी को भी बेटे की तरह से पालते थे। भाई-बहनों में निकिता छोटी थी। इसका बड़ा भाई नवीन तोमर बीटेक की पढ़ाई करने के बाद सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है। जबकि निकिता एनडीए के जरिए सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का सपना देख रही थी।

एकतरफा प्यार में आरोपी तौसीफ बन गया बेखौफ

मृतका के पिता मूलचंद तोमर ने दैनिक भास्कर को बताया कि मुख्य आरोपी तौसीफ के दादा कबीर अहमद विधायक रह चुके हैं। जबकि चाचा खुर्शीद अहमद हुड्‌डा सरकार में परिवहन मंत्री रहे हैं। आरोपी मेवात से कांग्रेसी विधायक आफताब आलम का चचेरा भाई बताया जा रहा है।

इसके चाचा जावेद अहमद 2019 में सोहना से एमएलए का बीएसपी से चुनाव लड़ चुके हैं। इसी राजनीतिक रसूख के चलते वह बेखौफ बन गया। 3 अगस्त 2018 को मुख्य आरोपी ने निकिता की तीन-चार सहेलियों को कार में बैठाकर बल्लभगढ़ छोड़ने के लिए आ रहा था। उसने निकिता को भी जबरन बैठा लिया था। कुछ दूर आने के बाद सहेलियों को उतार दिया लेकिन निकिता को अगवा कर ले गया था।

सहेलियों ने जब इसकी सूचना परिजनों को दी तो पुलिस को घटना की जानकारी दी गई थी। पुलिस ने दो घंटे में निकिता को बरामद कर अपहरण का केस दर्ज कर लिया था। उस वक्त भी उसके परिवार की ओर से दबाव बनाया जा रहा था। चूंकि चचेरा भाई कांग्रेस से विधायक हैं। इसके दादा भी पूर्व विधायक रह चुके हैं। इसी रसूख के चलते वह निकिता को परेशान करता था।

पुलिस की दस टीमों ने पांच घंटे में आरोपी को पकड़ा

दिनदहाड़े कॉलेज के सामने बीकॉम फाइनल ईयर की छात्रा निकिता की हत्या के बाद हरकत में आई फरीदाबाद पुलिस की दस टीमें अपराधियों की तलाश में जुट गईं। फरीदाबाद, पलवल और मेवात में पांच घंटे तक तलाशी के बाद मुख्य हत्यारोपी तौसीफ पकड़ में आ गया।

सूत्रों की मानें तो मुख्य आरोपी ने अपना मोबाइल नंबर बंद नहीं किया था। वह लगातार अपने आकाओं से बात कर रहा था। इसलिइए वह पुलिस के राडार पर था और पांच घंटे में ही उसे दबोच लिया।

100 दूरी पर थाना, एक भी पुलिसकर्मी नहीं थे काॅलेज के बाहर

घटनास्थल से बल्लभगढ़ सिटी थाने की दूरी महज 100 मीटर है। अग्रवाल कालेज में परीक्षाएं चल रही हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 4 बजे कॉलेज में परीक्षा खत्म होने के बाद एक भी पुलिस पीसीआर अथवा कोई पुलिसकर्मी वहां नहीं था। जबकि अग्रवाल कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ती हैं।

राजपत्रित अधिकारी करेंगे इस केस की जांच

पुलिस कमिश्नर ओपी सिंह का कहना है कि घटना की जांच के लिए एसीपी क्राइम अनिल कुमार की अगुवाई में एसआईटी गठित कर दी गई है। वही इसकी जांच करेंगे। पुलिस पीड़ित परिवार के साथ है। आरोपी के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं अन्य कई तरह के साक्ष्य पुलिस के पास हैं। जिनके आधार पर कोर्ट में अच्छी पैरवी कर आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

सवा तीन घंटे तक हाइवे रहा जाम

लव जेहाद के मामले से गुस्साए विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, धर्म जागरण मंच, देव सेना, किसान संघर्स समिति, राजपूत सभा समेत अन्य कई संगठन मंगलवार को सड़कों पर उतर आए। पहले सोहना बल्लभगढ़ रोड पर सुबह नौ बजे जाम लगा दिया।

इसके बाद भारी संख्या में लोग बीके चौक पहुंचे और जाम लगा दिया। दोपहर करीब 1.40 बजे भीड़ गुड ईयर के पास नेशनल हाइवे पर पहुंच गई और जाम लगा दिया। इस दौरान जाम खुलवाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया लेकिन गुस्साए लोग वहां से नहीं हटे। शाम करीब पांच बजे निकिता का शव मिलने और परिजनों की मांगें माने जाने के बाद परिजन व समर्थकों ने हाइवे का जाम खोला।



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