कीवी का एक पौधा देता है 40 साल तक फल

(यशपाल कपूर) कीवी मध्यपर्वतीय क्षेत्रों में लगने वाला फल है। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में मध्यपर्वतीय क्षेत्रों में गुठलीदार फलों, जिसमें पलम, खुरमानी, आड़ू होता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण इन फलदार फसलों पर रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इसके अलावा गुठलीदार फल जल्दी खराब होने वाले होते हैं और इसको तैयार होते ही बेचना पड़ता है। ऐसे में कीवी फल विकल्प के रूप में उभरा है। कीवी का पौधा 40 वर्ष से अधिक समय तक फल देता है और हर हर साल इसमें बराबर फल लगते हैं। इस फल में औषधीय गुणों का खजाना है। यह फल कैंसर, डेंगू, हार्ट के रोगियों के लिए भी अत्यंत गुणकारी है। हिमाचल देश में कीवी का जनक है। यहां से ही देश में कीवी की खेती शुरू हुई। देश में 1960 में लाल बाग बंगलुरू में सजावटी पौधे के तौर पर कीवी को लगाया गया था।

1984-85 में नौणी यूनिवर्सिटी में लगाए गए कीवी के पौधे, शोध होने के बाद निकला अच्छा परिणाम

कृषि विज्ञान केंद्र कंडाघाट के प्रभारी व फल वैज्ञानिक डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि नौणी यूनिवर्सिटी में 1984-85 में कीवी के पौधे लगाए गए। इस पर शोध हुई, यहां अच्छा फल निकला। वर्ष 1992 में दिल्ली के आढ़ती कोहली ने 120 रुपए प्रतिकिलोग्राम के भाव से यहां कीवी खरीदी। इसी दौरान थलेड़ी कीबेड़ के पंवर ब्रदर्स, कुल्लू में खुल्लर फार्म, सोलन के प्रकाश राणा, सिरमौर के नाया पंजौड़ मतियाइक नर्सरी ने कीवी के बगीचे लगाए गए। सिरमौर की नर्सरी आज भी बागबानों को कीवी के पौधे मुहैया करवा रही है। धीरे-धीरे प्रदेश व देश में कीवी उत्पादन की ओर लोगों का रूझान बढ़ा। हिमाचल में डेढ़ सौ हेक्टेयर में कीवी लगाई गई है।

पंवर ब्रदर्स ने 180 पौधों का लगाया था पहला बगीचा
सिरमौर जिला की उपतहसील नारग के गांव थलेड़ी की बेड़ के नरेंद्र पंवर ने बताया कि उन्होंने अपने भाई जगदेव पंवर के साथ मिलकर कीवी की व्यवसायिक खेती की। दिसंबर 1993 में कीवी के 180 पौधे लगाए। इसमें कीवी की पांच प्रजातियों के पौधे थे। नरेंद्र पंवर ने बताया कि शुरू में मार्केटिंग की बहुत समस्या आई, लोग इस फल के बारे में जानते तक नहीं थे। उन्होंने पहले पहले चंडीगढ़ और पंजाब की मंडियों कीवी को भेजा, लेकिन उन्हें कोई खास लाभ नहीं मिला। दो दशकों से वह दिल्ली भेज रहे है।

कीवी लगाने से पहले तकनीकी जानकारी जरूरी

देश की अग्रणी व प्रगतिशील कीवी उत्पादक नरेंद्र पंवार ने कहा कि कीवी उत्पादन मध्य पर्वतीय क्षेत्र के लिए मुफीद है, लेकिन इसके लिए बागबान को पहले इसकी तकनीकी जानकारी होनी बहुत जरूरी है। बगीचेक की कांट-छाट और हैंड पॉलिनेशन बहुत आवश्यक है, यदि कोई युवा कीवी की व्यवसायिक खेती करना चाहता है। हिमाचल प्रदेश के मध्यपर्वतीय क्षेत्र जिनकी ऊंचाई समुद्र तल से 900 से 1800 मीटर है, इसकी बागबानी के लिए उपयुक्त है।

देश की अग्रणी व प्रगतिशील कीवी उत्पादक नरेंद्र पंवार ने कहा कि कीवी उत्पादन मध्य पर्वतीय क्षेत्र के लिए मुफीद है, लेकिन इसके लिए बागबान को पहले इसकी तकनीकी जानकारी होनी बहुत जरूरी है। की कांट-छाट और हैंड पॉलिनेशन बहुत आवश्यक है, यदि कोई युवा कीवी की व्यवसायिक खेती करना चाहता है। हिमाचल प्रदेश के मध्यपर्वतीय क्षेत्र जिनकी ऊंचाई समुद्र तल से 900 से 1800 मीटर है, इसकी बागबा नी के लिए उपयुक्त है।

कीवी की किस्में...

कीवी में नर और मादा फूल आते हैं। इसकी प्रमुख मादा किस्में है हेबर्ट, एबट, एलिसन, ब्रूनो और मोंटी, जबकि नर किस्में हैं एलिसन और तमूरी। यहां एलिसम किस्म सबसे बेहतर है।

5 साल में फल देने लगता है पौधा... किवी फल के पौधों में अच्छी पैदावार रोपण के 5 साल बाद आरंभ होती है। व्यवसायिक स्तर पर 8 से 10 साल का समय लग जाता है।

दो दशक से कर रहे काम... फल विज्ञान विभाग के प्रधान वैज्ञानिक व कीवी पर दो दशकों से कार्य कर रहे डॉ विशाल राणा ने बताया कि कीवी फल मध्यपर्वतीय क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है।



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हिमाचल प्रदेश में उगाई गई सबसे पहले कीवी


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